हुआ यूँ कि एक दिन मुझे किसी को अर्जेंट फोन करना था | घर का फोन मैं पहले ही कटवा चुका था और चूंकि बेटे को कार्यवश घर से बाहर रहना पड़ता था, इसलिए उसे उसका मनपसंद मोबाईल दिला दिया था | घर के बाहर एसटीडी की दुकान तक जाने की हिम्मत थी नहीं | अत: बेटे को ही कहना पड़ा, 'बेटे एक अर्जेंट फोन करना है,ज़रा अपना मोबाईल तो दिखाना |"
बेटे ने मोबाईल देने की बज़ाय मुझे ही सीख दे डाली | कहने लगा, "तुम्हें तो रोज़ ही कहीं न कहीं अर्जेंट फोन करना ही होता है | अगर फोन की इतनी ही ज़रुरत थी तो फोन कटवाया ही क्यूँ था ? जिस दिन अपना मोबाईल ले लोगे, तब पूछूगा कि कितने फोन करते हो ? आजकल तो रिक्शा वाले भी मोबाईल रखते हैं, आप तो फ़िर भी उनसे कहीं अच्छे हो, आप भी क्यों नही रख लेते ?' उसे अच्छी तरह पता था कि मुझे मोबाईल से चिढ़ क्यों है ? चाहे ज़रुरत हो या ना हो, मोबाईल की अपनी एक शान हैं ! लेकिन इस शान से चिढ़ केवल इसलिए है कि चाहे आपकी ताकत मोबाईल रखने की है या नहीं , लेकिन रखना ज़रुर है | आपकी ताकत का अंदाज़ा उस समय ही लग जाता है, जब आप किसी को फोन करने की बज़ाय उसे 'मिस कॉल ' मारते हो | अगर आपकी ताकत है तो ज़रा 'मिस कॉल' मारने की बज़ाय उसे फोन तो करो |
ख़ैर,बेटे ने थोड़ा ना-नुकुर करने के बाद रोज़ की तरह मोबाइल मुझे थमा दिया | मोबाइल मुझे चलाना तो आता नहीं था,जब भी जरुरत पड़ती थी,बेटा नंबर मिला कर मुझे थमा देता था | मगर उस दिन उसने गुस्से में मोबाइल ही मुझे थमा दिया था,सो एक गलत बटन दब गया और स्क्रीन पर उभरी फ़ोन बुक | फ़ोन बुक ओपन हुई तो बेटे के यार दोस्त और रिश्तेदारों क नाम सामने थे | इसी लिस्ट में जब एक नाम देखा तो चौंक उठा | बिग बी - यानि अमिताभ बच्चन | महानायक अमिताभ बच्चन | तो क्या मेरे बेटे क एप्रोच अमिताभ (बच्चन) तक है ? कमाल है,सफलता की उच्चाईयों पर बेठे अमिताभ का फ़ोन नंबर मेरे बेटे के मोबाइल पर | मन में एक हूक - सी उठी कि अमिताभ जी से एक बार औरों की तरह मैं भी बात करूँ | सफलता के पर्याय से बात करना किसे अच्छा नहीं लगेगा | आखिरकार,मैं भी तो औरों की तरह उनका एक बहुत बड़ा फैन था | मैं मन ही मन बड़ा खुश हो गया था कि मुझे भी इस सदी के महानायक से बात करने का मौका मिलेगा |
मैं अपना अर्जेंट फ़ोन करना भूल गया और बेटे को अमिताभ से बात कराने के लिए मनाने लगा |
"पापा तुमने जहा फ़ोन करना था वहां करने की बजाय फ़ोन बुक खोल कर बैठ गये | क्या मतलब है आपका ? मेरा किस-किस के साथ दोस्ताना है,क्या जरुरत है जानने की ? क्या आप मेरे सारे दोस्तों को जानते हैं ?"
बात सही भी थी | "लेकिन बिग बी अमिताभ का नाम तुम्हारी फ़ोन बुक में देखते ही रहा नही गया,इसलिए एक बार बात कराने में तुम्हारा क्या चला जायेगा ?" मैं फिर बेटे को मनाने लगा था |
"अच्छा चलो,मैं आपकी बात तो करा दूंगा,लेकिन यदि उन्होंने बात नहीं करनी चाही तो ?"
"क्यूँ नहीं करना चाहेंगे ? आखिरकार तुम इतने बड़े प्रोडूसर बन गए हो | ये बात अलग है कि तुमने अभी तक "मदर इंडिया मुग़ले आज़म या शोले" जैसी भव्य फिल्मो का निर्माण तो नहीं किया है,लेकिन आज तक तुमने जितनी भी डाक्यूमेंट्री बनायीं है वह भी तो "मदर इंडिया , मुग़ले आज़म या शोले" से कम नहीं हैं | मैंने बेटे को हिमालय पर चढ़ाने के लिए फूँक देने की कोशिश की |
"अच्छा पापा,जिस बिग बी से आप बात करने के लिए इतने लालायित हो रहे हो,ये अगर वह अमिताभ नही हुए तो ..."
"लेकिन बेटे बिग बी अमिताभ तो विश्व में एक ही हैं " |
"लेकिन ये जो अमिताभ हैं ये वे बिग बी नहीं हैं जिनसे आप बात करने के लिए मेरे ऊपर इतना जोर डाल रहे हैं दुनिया में उनके अलावा और भी तो अमिताभ हैं " |
"लेकिन बिग बी तो और अमिताभ नही हैं ना " |
"अच्छा पापा,आप जानते हैं बिग बी का मतलब क्या है ?" हमने अपने "अमिताभ" को बिग बी की उपाधि क्यूँ दी है ? क्या आपको पता है कि आजकल इक्कीसवी सदी के युवाओं की अपनी एक भाषा बनती जा रही है, जिसे "गुप्त भाषा" भी कहा जाता है | "
अब हैरान होने की मेरी बारी थी |
"हाँ पापा, आप तो बसों में रोज़ आते-जाते रहते हो | कभी कॉलेज के लडको की बातें सुनी है आपने ? अपनी बातचीत में कभी-कभी वे छोटे-छोटे शब्दों का भी इस्तेमाल करते हैं, जैसे के.के. या आर.एन.एस.एच., आदि आदि |
"हाँ - हाँ बेटे, कभी-कभी सुना तो है |"
"उनका मतलब जानते हैं आप ?"
फिर मैंने "ना" में सिर हिल दिया |
मैं बताता हूँ,कहते हुए बेटे ने बताना शुरू किया, जब वे के.के. कहें तो समझ लेना कि वे किसी की बुराई कर रहे हैं, उससे काला कुत्ता या कटखना कुत्ता कह कर ! कभी-कभी वे कुत्ता-कमीना के लिए भी ये शब्द प्रयोग करते हैं | यदि वे कहीं लड़ाई-झगड़े के लिए जा रहे हैं तो कहते मिलेंगे उसका आर.एन.एस.एच. बना देंगे, ये आर.एन.एस.एच. क्या होता है ? इसका मतलब है,"राम नाम सत्य है |"
"लेकिन इन सब का मतलब बिग बी से क्या है ?"
"पापा, ये तो अमिताभ है,ये हमारे टीम लीडर है |काबिल इतने है की कई चैनल्स इन्हें इन्ही की शर्तो पर नौकरी देने के लिए तैयार, मुहमांगे वेतन पर,परन्तु जाना ही नहीं चाहते | कहते हैं भगवान् ने इतना कुछ दिया हुआ है कि और पाने की तमन्ना ही नहीं है | अब कोई इन भलेमानस से पूछे कि आज दुनिया में ऐसा कौन-सा इंसान है, जिसकी पैसे की भूख ख़तम हो चुकी हो | मूड में आएगा तो आप से सौ रुपए के लिए लड़ लेंगे और मूड में होगा तो हजारो-लाखों खर्च करने में एक मिनट भी नही लगायेंगे | मूड में आने के बाद आपका काम निकालने के लिए सब-दांव पर लगा देंगे और अपने बड़े से बड़े काम को अंजाम देने के लिए पांच-सौ हजार के लिए भी अड़ जायेंगे ! और इनके क्या-क्या किस्से सुनाऊं ?"
"लेकिन इन सब का 'बिग बी' के साथ क्या सम्बन्ध ?"
"पापा, कभी भी नहीं समझे, रहे बुद्धू के बुद्धू ! तभी तो मैं कहता हूँ कि उन्नीसवी सदी के लोग हम इक्कीसवी सदी के लोगो के साथ नहीं चल सकते | उसने बात आगे जारी रखते हुए बताया " और एक दिन हम सब टीम के लड़के-लड़कियों ने एक प्रस्ताव पास किया और हमने उन्हें बिग बी की उपाधि दे डाली | उनकी इन्हीं हरकतों के कारण हमने उन्हें ये उपाधि दी थी -
बिग बी - यानि बड़ा बेवकूफ !!!