भगवान श्री सूर्य देव अपने सिंहासन की तरफ अपने परिवार के साथ बढ़ रहे थे। सिंहासन के समीप पहुँच कर यमुना जी अपने सिंहासन पर विराजमान होती हैं , साथ ही भगवान सूर्यदेव भी अपने सिंहासन पर व उनकी पत्नी छाया भी सिंहासन विराजमान होती हैं। तभी धर्मराज जी का आगमन है ! धर्मराज जी अपने माता पिता के चरणों में प्रणाम कर सिंहासन विराजमान हैं। तभी :