हे परमपिता परमेश्वर,
सादर चरण स्पर्श !
धरती के तुच्छ प्राणियों की ओर से विनती है कि वे यहाँ पर सकुशल से हैं और आपकी कुशलता ...किससे नेक भला चाहें क्योंकि आप तो स्वयं परमपिता हैं और जो परमपिता होता है उसकी नेक भलाई किससे मांगी जाए !
आगे धरती के स्मचल सुनाए जाएँ, इससे पहले मैं आपको आपकी एक कहानी सुनाना चाहती हूँ । मुझे मेरे बचपन में मेरी माँ ने सुनाई थी, आज इस पत्र के माध्यम से आपको सुनाना चाहती हूँ । वैसे मैं यह भी जानती हूँ की आपने यह कहानी पहले भी सुन रखी होगी !
एक बार आप और आपकी धर्मपत्नी यानि मत महालक्ष्मी में इस बात की शर्त लग गई की आप दोनों में बड़ा