जिंदगी और मौत के
दरम्यान सोंचता है इंसान ,
कब तक रहूँगा लटका ,
क्योंकि मौत का झटका ,
न जाने कब मुझे ले जाये ,
और ,
ना जाने किस गली में शाम हो जाये ,
इसलिए ,
जिंदगी की शराब की ,
ये चंद बूँद तो पी लूँ ,
किसी गली में ,
जिंदगी की शाम होने से पहले तो
जी लूँ ,
जीने के लिए ,
आखरी जाम तो चढ़ा लूँ ,
किसी को मौत का क्या पता ,
इसी आस पर ,
डूबती शाम को ,
थोडा और बाधा लूँ ।।
दरम्यान सोंचता है इंसान ,
कब तक रहूँगा लटका ,
क्योंकि मौत का झटका ,
न जाने कब मुझे ले जाये ,
और ,
ना जाने किस गली में शाम हो जाये ,
इसलिए ,
जिंदगी की शराब की ,
ये चंद बूँद तो पी लूँ ,
किसी गली में ,
जिंदगी की शाम होने से पहले तो
जी लूँ ,
जीने के लिए ,
आखरी जाम तो चढ़ा लूँ ,
किसी को मौत का क्या पता ,
इसी आस पर ,
डूबती शाम को ,
थोडा और बाधा लूँ ।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें