हे परमपिता परमेश्वर,
सादर चरण स्पर्श !
धरती के तुच्छ प्राणियों की ओर से विनती है कि वे यहाँ पर सकुशल से हैं और आपकी कुशलता ...किससे नेक भला चाहें क्योंकि आप तो स्वयं परमपिता हैं और जो परमपिता होता है उसकी नेक भलाई किससे मांगी जाए !
आगे धरती के स्मचल सुनाए जाएँ, इससे पहले मैं आपको आपकी एक कहानी सुनाना चाहती हूँ । मुझे मेरे बचपन में मेरी माँ ने सुनाई थी, आज इस पत्र के माध्यम से आपको सुनाना चाहती हूँ । वैसे मैं यह भी जानती हूँ की आपने यह कहानी पहले भी सुन रखी होगी !
एक बार आप और आपकी धर्मपत्नी यानि मत महालक्ष्मी में इस बात की शर्त लग गई की आप दोनों में बड़ा
कौन है ? बहस जब बहुत बढ़ गई और फैसला नहीं हो पाया तो सवाल उठा कि फैसला कैसे हो ? इसी बात को लेकर आप माता महालक्ष्मी के साथ इस तुच्छ धरती पर उतर आए। दोनों बातें करते चल ही रहे थे कि सामने से एक अर्थी आती हुई नज़र आई । माता महालक्ष्मी ने आपसे पूछा कि चमत्कार पहले आप दिखाएँगे या वे दिखाएँ ? अपने माता को आदेश दिया और माता वहां जाकर बरसने लगीं जहाँ से अर्थी गुजर रही थी । लोगों ने अर्थी को वहीँ रख कर "लक्ष्मी" जी को समेटना शुरू कर दिया । अब माता ने आपसे कहा कि आप अपना चमत्कार दिखाओ तो अपने इशारे से बताया कि आप चमत्कार तो देख ही रही हैं । माता ने पूछा कैसे तो आपका जवाब था कि पैसे तो उन्होंने उठाए जिनमे मैं विद्यमान था । मैं तो आपको तब बड़ा मानता जब वह अर्थी पर लेटा आदमी खड़े होकर आपको बटोरता ! माता निरुतर थी !
कौन है ? बहस जब बहुत बढ़ गई और फैसला नहीं हो पाया तो सवाल उठा कि फैसला कैसे हो ? इसी बात को लेकर आप माता महालक्ष्मी के साथ इस तुच्छ धरती पर उतर आए। दोनों बातें करते चल ही रहे थे कि सामने से एक अर्थी आती हुई नज़र आई । माता महालक्ष्मी ने आपसे पूछा कि चमत्कार पहले आप दिखाएँगे या वे दिखाएँ ? अपने माता को आदेश दिया और माता वहां जाकर बरसने लगीं जहाँ से अर्थी गुजर रही थी । लोगों ने अर्थी को वहीँ रख कर "लक्ष्मी" जी को समेटना शुरू कर दिया । अब माता ने आपसे कहा कि आप अपना चमत्कार दिखाओ तो अपने इशारे से बताया कि आप चमत्कार तो देख ही रही हैं । माता ने पूछा कैसे तो आपका जवाब था कि पैसे तो उन्होंने उठाए जिनमे मैं विद्यमान था । मैं तो आपको तब बड़ा मानता जब वह अर्थी पर लेटा आदमी खड़े होकर आपको बटोरता ! माता निरुतर थी !
ये कहानी कब किस ज़माने में बनी होगी, ये कहना तो मुश्किल है, मगर आज के संधर्भ में यह कहानी उलट हो गई है । धरती के ये तुच्छ प्राणी आपकी पत्नी को तो अपने पास रखना चाहते हैं, परन्तु अब वे आपके अस्तित्व को नकारने में लग गए हैं ।
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