सोमवार, 17 जून 2013

एक जिंदगी ऐसी भी !!

मैं अपनी जिंदगी से ,
घबरा गया हूँ ,
चला जाना चाहता हूँ ,
दूर , बहुत दूर , उस 
दूर क्षितिज के पार , जहाँ 
मैं , अपने सपनो का संसार 
रचा सकूँ , बना सकूँ , अपनी 
नगरी में प्रवेश के लिए 
फूलों के द्वार ,
प्रेम की दीवारों से ,
बने घर । और उन घरों तक 
जाने के लिए हों ,
चांदी की सड़कें , जिनके किनारे 
पर खड़े हों , सोने के 
फूलों से लदे वृक्ष , उस नगरी में ,
जहाँ गरीबी न हो ,
मुस्कान बिखेरते सबों के चेहरे ,
मैं ऐसी नगरी बनाना चाहता हूँ ।    

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