मैं अपनी जिंदगी से ,
घबरा गया हूँ ,
चला जाना चाहता हूँ ,
दूर , बहुत दूर , उस
दूर क्षितिज के पार , जहाँ
मैं , अपने सपनो का संसार
रचा सकूँ , बना सकूँ , अपनी
नगरी में प्रवेश के लिए
फूलों के द्वार ,
प्रेम की दीवारों से ,
बने घर । और उन घरों तक
जाने के लिए हों ,
चांदी की सड़कें , जिनके किनारे
पर खड़े हों , सोने के
फूलों से लदे वृक्ष , उस नगरी में ,
जहाँ गरीबी न हो ,
मुस्कान बिखेरते सबों के चेहरे ,
मैं ऐसी नगरी बनाना चाहता हूँ ।
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