सोमवार, 24 जून 2013

ये कैसी विडम्बना ..

हम प्राणियों की ये कैसी विडम्बना है कि ताउम्र हम जिसे मंदिरों-मस्जिदों-गुरुद्वारों में ढूंढ़ते फिरते हैं जब वह हमे मिलने आता है, अपने साथ ले जाने के लिए आता है तब हम उससे दूर भागने लगते है ये कहकर कि हम अभी जी ही कहाँ पाए हैं, हमे जीने के लिए थोड़ी उम्र तो दे दो । जब हमे जरुरत होगी तब देखेंगे ! 

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