सोमवार, 17 जून 2013

गुमनाम अँधेरे..!!

जिंदगी के गुमनाम अंधेरों में ,
खो गया हूँ मैं ,
चला कहाँ से था , मंजिल के लिए ,
आ पहुंचा कहाँ हूँ ,
ये सोच कर रो दिया हूँ मैं ,
जिंदगी के गुमनाम अंधेरों में ,
खो गया हूँ मैं ,

लगता है मंजिल तक ,
नहीं पहुँच पाउँगा ,
बीच में ही किसी रास्ते पर ,
सदा के लिए सो जाऊंगा ,
ये सोंच कर रो दिया हूँ मैं ,
जिंदगी के गुमनाम अंधेरों में ,
खो गया हूँ मैं ,

मंजिल अभी दूर है ,
और जिंदगी की शाम है ,
बोतल हो गयी है खाली ,
मगर लगता है कि जाम है ,
जिंदगी की देख बोतल खाली ,
रो दिया हूँ मैं ,
जिंदगी के गुमनाम अंधेरों में ,
खो गया हूँ मैं !! 

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